श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.119.36 
अपत्यं धर्मफलदं श्रेष्ठं विन्दन्ति मानवा:।
आत्मशुक्रादपि पृथे मनु: स्वायम्भुवोऽब्रवीत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'पृथे! अपने वीर्य के बिना भी मनुष्य श्रेष्ठ पुरुष के संसर्ग से श्रेष्ठ पुत्र प्राप्त कर सकता है और वह धर्म का फल देने वाला है, ऐसा स्वायम्भुव मनु ने कहा है ॥36॥
 
'Prithe! Even without one's own semen, a man can obtain a noble son through the relationship of a noble man and he is the one who gives the fruits of Dharma, this is what Swayambhuva Manu has said. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)