Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.119.30: हे शुद्ध मुस्कान वाली कुन्ती भोजकुमारी! इस प्रकार विचार करने पर मैं देखती हूँ कि संतानहीन होने के कारण मैं शुभ लोकों को प्राप्त नहीं कर सकती। मैं इसी चिंता में निरन्तर डूबी रहती हूँ॥30॥ | mahabharat अध्याय 1.119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽहमेवं विदित्वैतत् प्रपश्यामि शुचिस्मिते।
अनपत्य: शुभाँल्लोकान् न प्राप्स्यामीति चिन्तयन्॥ ३०॥
अनुवाद
हे शुद्ध मुस्कान वाली कुन्ती भोजकुमारी! इस प्रकार विचार करने पर मैं देखती हूँ कि संतानहीन होने के कारण मैं शुभ लोकों को प्राप्त नहीं कर सकती। मैं इसी चिंता में निरन्तर डूबी रहती हूँ॥30॥
'O Kunti Bhojakumari with a pure smile! After thinking in this manner, I see that being childless, I cannot attain the auspicious worlds. I am constantly immersed in this worry.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥