Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.119.2: भरत! वह ऋषियों-मुनियों की सेवा करता था, अहंकार से दूर रहता था और अपने मन को वश में रखता था। उसने अपनी सभी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी। वह सदैव अपनी शक्ति से स्वर्ग जाने का प्रयत्न करता रहता था। 2. | mahabharat अध्याय 1.119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरत! वह ऋषियों-मुनियों की सेवा करता था, अहंकार से दूर रहता था और अपने मन को वश में रखता था। उसने अपनी सभी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी। वह सदैव अपनी शक्ति से स्वर्ग जाने का प्रयत्न करता रहता था। 2.
Bharat! He served the sages and saints, stayed away from ego and kept his mind under control. He had conquered all his senses. He was always trying to go to heaven with his own power. 2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥