श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  1.119.14-15h 
वायुरेको हि यात्यत्र सिद्धाश्च परमर्षय:।
गच्छन्त्यौ शैलराजेऽस्मिन् राजपुत्र्यौ कथं त्विमे॥ १४॥
न सीदेतामदु:खार्हे मा गमो भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
इस मार्ग पर केवल वायु ही चल सकती है और सिद्ध महर्षि भी जा सकते हैं। इस पर्वत पर चलते समय इन दोनों राजकुमारियों को कष्ट कैसे नहीं होगा? हे भरतवंश के शिरोमणि! ये दोनों रानियाँ कष्ट सहन करने में समर्थ नहीं हैं; अतः आपको नहीं जाना चाहिए।॥14 1/2॥
 
‘Only the wind can move on this path and even Siddha Maharshis can go. How will these two princesses not suffer while walking on this mountain? O head of the Bharata dynasty! These two queens are not capable of bearing the pain; therefore you should not go.'॥ 14 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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