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mahabharat 1.118.48: तत्पश्चात् चैत्ररथ नामक वन में जाकर कालकूट और हिमालय पर्वत को पार करते हुए वे गन्धमादन के पास गए ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.118.48 
स चैत्ररथमासाद्य कालकूटमतीत्य च।
हिमवन्तमतिक्रम्य प्रययौ गन्धमादनम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् चैत्ररथ नामक वन में जाकर कालकूट और हिमालय पर्वत को पार करते हुए वे गन्धमादन के पास गए ॥48॥
 
After that, going to the forest named Chaitrarath, crossing Kalkoot and Himalayan mountains, he went to Gandhamadan. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)