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श्लोक  1.118.46 
न शय्यासनभोगेषु रतिं विन्दति कर्हिचित्।
भ्रातृशोकसमाविष्टस्तमेवार्थं विचिन्तयन्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
उसे बिस्तर, आसन और नाना प्रकार के सुखों में कभी रुचि नहीं रही। अपने भाई के शोक में डूबा हुआ, वह सदैव उसी के बारे में सोचता रहता था। 46.
 
He never had any interest in beds, seats and various kinds of pleasures. Immersed in grief for his brother, he always kept thinking about him. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)