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mahabharat 1.118.4: उसी कामातुर राजा की पत्नी से ऋषि एवं वाणी को वश में रखने वाले भगवान श्री कृष्णद्वैपायन ने मुझे जन्म दिया॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.118.4 
तस्य कामात्मन: क्षेत्रे राज्ञ: संयतवागृषि:।
कृष्णद्वैपायन: साक्षाद् भगवान् मामजीजनत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उसी कामातुर राजा की पत्नी से ऋषि एवं वाणी को वश में रखने वाले भगवान श्री कृष्णद्वैपायन ने मुझे जन्म दिया॥4॥
 
From the same lustful king's wife, Lord Shri Krishnadvaipayana, the sage and person who controlled his speech, gave birth to me. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)