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mahabharat 1.118.37: इस प्रकार वानप्रस्थ-आश्रम-सम्बन्धी शास्त्रों के कठोरतम नियमों का पालन करने की आकांक्षा रखते हुए मैं शरीर का अन्त होने तक वानप्रस्थ-आश्रम में ही रहूँगा॥37॥   |   mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.118.37 
एवमारण्यशास्त्राणामुग्रमुग्रतरं विधिम्।
काङ्क्षमाणोऽहमास्थास्ये देहस्यास्या समापनात्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वानप्रस्थ-आश्रम-सम्बन्धी शास्त्रों के कठोरतम नियमों का पालन करने की आकांक्षा रखते हुए मैं शरीर का अन्त होने तक वानप्रस्थ-आश्रम में ही रहूँगा॥37॥
 
In this way, aspiring to follow the strictest rules of the scriptures related to Vanaprastha-Ashram, I will remain in Vanaprastha-Ashram until the body comes to an end. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)