Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.118.31: पाण्डु बोले - देवियो! यदि तुम दोनों का यही धर्मसम्मत निर्णय है, तो (ठीक है, मैं संन्यास नहीं लूँगा और वानप्रस्थ आश्रम में रहूँगा तथा) आज से मैं अपने पिता वेदव्यासजी की अनन्त फल देने वाली जीवनचर्या का पालन करूँगा॥ 31॥ | mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पाण्डुरुवाच
यदि व्यवसितं ह्येतद् युवयोर्धर्मसंहितम्।
स्ववृत्तिमनुवर्तिष्ये तामहं पितुरव्ययाम्॥ ३१॥
अनुवाद
पाण्डु बोले - देवियो! यदि तुम दोनों का यही धर्मसम्मत निर्णय है, तो (ठीक है, मैं संन्यास नहीं लूँगा और वानप्रस्थ आश्रम में रहूँगा तथा) आज से मैं अपने पिता वेदव्यासजी की अनन्त फल देने वाली जीवनचर्या का पालन करूँगा॥ 31॥
Pandu said - Ladies! If this is the decision of both of you in accordance with Dharma, then (okay, I will not take Sanyas and will stay in Vanaprastha Ashram and) from today onwards I will follow the lifestyle of my father Vedvyasji which has everlasting fruits.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥