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mahabharat 1.118.28: ‘तुम्हारी तपस्या तुम्हें स्वर्ग का महान फल प्रदान कर सकती है और इस शरीर से भी मुक्ति दिला सकती है। उस तपस्या के प्रभाव से तुम स्वर्ग के स्वामी इन्द्र भी बन सकते हो, इसमें कोई संदेह नहीं है।॥28॥   |   mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.118.28 
शरीरस्यापि मोक्षाय स्वर्ग्यं प्राप्य महाफलम्।
त्वमेव भविता भर्ता स्वर्गस्यापि न संशय:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारी तपस्या तुम्हें स्वर्ग का महान फल प्रदान कर सकती है और इस शरीर से भी मुक्ति दिला सकती है। उस तपस्या के प्रभाव से तुम स्वर्ग के स्वामी इन्द्र भी बन सकते हो, इसमें कोई संदेह नहीं है।॥28॥
 
‘Your penance can enable you to attain the great fruit of heaven and also liberate you from this body. There is no doubt that due to the effect of that penance, you can become the Lord of heaven, Indra.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)