Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.118.23: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! ऐसा कहकर राजा पाण्डु अत्यन्त शोक में डूबे हुए, गहरी साँस लेकर कुन्ती और माद्री की ओर देखकर उनसे इस प्रकार बोले -॥23॥ | mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा सुदु:खार्तो नि:श्वासपरमो नृप:।
अवेक्षमाण: कुन्तीं च माद्रीं च समभाषत॥ २३॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! ऐसा कहकर राजा पाण्डु अत्यन्त शोक में डूबे हुए, गहरी साँस लेकर कुन्ती और माद्री की ओर देखकर उनसे इस प्रकार बोले -॥23॥
Vaishmpayana says: 'O Janamejaya! Having said this, King Pandu, overcome with great grief, taking a deep breath and looking at Kunti and Madri, spoke to them thus:॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥