Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.118.12: जैसे पिता अपने बच्चों के साथ सदैव समान व्यवहार करता है, वैसे ही मैं भी सब प्राणियों के साथ सदैव समान व्यवहार करूँगा। (जैसा पहले कहा गया है) मैं दिन में केवल एक बार वृक्षों से भिक्षा लूँगा अथवा यदि वह भी संभव न हो तो दस-पाँच घरों में जाकर (थोड़ी मात्रा में) भिक्षा लूँगा।॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वासु प्रजास्विव सदा सम: प्राणभृतां प्रति।
एककालं चरन् भैक्ष्यं कुलानि दश पञ्च वा॥ १२॥
अनुवाद
जैसे पिता अपने बच्चों के साथ सदैव समान व्यवहार करता है, वैसे ही मैं भी सब प्राणियों के साथ सदैव समान व्यवहार करूँगा। (जैसा पहले कहा गया है) मैं दिन में केवल एक बार वृक्षों से भिक्षा लूँगा अथवा यदि वह भी संभव न हो तो दस-पाँच घरों में जाकर (थोड़ी मात्रा में) भिक्षा लूँगा।॥12॥
Just as a father always treats his children equally, similarly I will always treat all creatures equally. (As said earlier) I will beg alms from trees only once a day or if that is not possible then I will go to ten or five houses and collect alms (in small amounts).॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥