श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 117: राजा पाण्डुके द्वारा मृगरूपधारी मुनिका वध तथा उनसे शापकी प्राप्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.117.27 
द्वयोर्नृशंसकर्तारमवशं काममोहितम्।
जीवितान्तकरो भाव एवमेवागमिष्यति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तूने मैथुनरत एक पुरुष और एक स्त्री को निर्दयतापूर्वक मार डाला है। तू अजेय है और काम से मोहित है; अतः यदि तू भी इसी प्रकार मैथुनरत हो जाएगा, तो तेरे जीवन का अंत करने वाली मृत्यु अवश्य ही तुझ पर आक्रमण करेगी॥ 27॥
 
You have ruthlessly killed a man and a woman who were engaged in sexual intercourse. You are unconquerable and infatuated by lust; therefore, if you indulge in sexual intercourse in the same way, then death, which ends your life, will certainly attack you.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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