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mahabharat 1.115.4-5: यदि महर्षि ने उक्त मांस को सौ भागों में विभक्त कर दिया और सुबलपुत्री गांधारी ने गर्भधारण या प्रसव नहीं किया, तो दु:शला नाम की वह कन्या कैसे उत्पन्न हुई? ब्रह्मर्षे! यह सब यथार्थ रूप से मुझसे कहिए। मुझे इस विषय में बड़ी जिज्ञासा है। 4-5॥   |   mahabharat अध्याय 1.115: दु:शलाके जन्मकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 115: दु:शलाके जन्मकी कथा  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  1.115.4-5 
यदि भागशतं पेशी कृता तेन महर्षिणा।
न प्रजास्यति चेद् भूय: सौबलेयी कथंचन॥ ४॥
कथं तु सम्भवस्तस्या दु:शलाया वदस्व मे।
यथावदिह विप्रर्षे परं मेऽत्र कुतूहलम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
यदि महर्षि ने उक्त मांस को सौ भागों में विभक्त कर दिया और सुबलपुत्री गांधारी ने गर्भधारण या प्रसव नहीं किया, तो दु:शला नाम की वह कन्या कैसे उत्पन्न हुई? ब्रह्मर्षे! यह सब यथार्थ रूप से मुझसे कहिए। मुझे इस विषय में बड़ी जिज्ञासा है। 4-5॥
 
If Maharishi divided the said flesh into a hundred parts and if Subalputri Gandhari did not conceive or give birth again, then how was that girl named Duhshaala born? Brahmarshe! Tell me all this realistically. I am very curious about this. 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)