Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.115.17-18: ऐसा कहकर महातपस्वी व्यास ने घी से भरा दूसरा पात्र मँगवाया और तपस्वी मुनि ने कन्या को उसमें डाल दिया। हे भरतवंशी! इस प्रकार मैंने आपको दु:शाला के जन्म की कथा सुनाई। हे अनघ! अब मैं और क्या कहूँ, कहिए। | mahabharat अध्याय 1.115: दु:शलाके जन्मकी कथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा कहकर महातपस्वी व्यास ने घी से भरा दूसरा पात्र मँगवाया और तपस्वी मुनि ने कन्या को उसमें डाल दिया। हे भरतवंशी! इस प्रकार मैंने आपको दु:शाला के जन्म की कथा सुनाई। हे अनघ! अब मैं और क्या कहूँ, कहिए।
Having said this, the great ascetic Vyasa called for another pot filled with ghee and the ascetic sage put the girl in it. O King of the Bharat dynasty! Thus have I narrated to you the story of Dushala's birth. O Anagha! Tell me, what else should I say now?
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि दु:शलोत्पत्तौ पञ्चदशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें दु:शलाकी उत्पत्तिसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥