श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.114.33 
वाक्यस्यैतस्य निधने दिक्षु सर्वासु भारत।
क्रव्यादा: प्राणदन् घोरा: शिवाश्चाशिवशंसिन:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! धृतराष्ट्र के बोलते ही चारों दिशाओं में भयंकर मांसभक्षी जीव दहाड़ने लगे। गीदड़ अशुभ वचन बोलने लगे।
 
Janamejaya! As soon as Dhritarashtra finished speaking, the fierce carnivorous creatures started roaring in all the four directions. The jackals started speaking ominous words.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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