श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.114.31 
युधिष्ठिरो राजपुत्रो ज्येष्ठो न: कुलवर्धन:।
प्राप्त: स्वगुणतो राज्यं न तस्मिन् वाच्यमस्ति न:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
‘आदरणीय ज्येष्ठजन! हमारे कुल का नाम रोशन करने वाले राजकुमार युधिष्ठिर सबमें ज्येष्ठ हैं। वे अपने गुणों के कारण राज्य के अधिकारी हो चुके हैं। उनके विषय में हमें कुछ नहीं कहना है॥31॥
 
‘Respected elders! Prince Yudhishthira, who has brought glory to our clan, is the eldest among all. He has already become entitled to the kingdom due to his qualities. We have nothing to say about him.॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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