श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.114.21 
एकाधिकशतं पूर्णं यथायोगं विशाम्पते।
मांसपेश्यास्तदा राजन् क्रमश: कालपर्ययात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजन! समय के परिवर्तन से उस मांसपिंड के धीरे-धीरे आवश्यकतानुसार एक सौ एक अंग हो गए ॥21॥
 
Rajan! Due to the change in time, that body of flesh gradually got one hundred and one parts as per its requirement. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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