श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.114.2 
पाण्डो: कुन्त्यां च माद्रॺां च पुत्रा: पञ्च महारथा:।
देवेभ्य: समपद्यन्त संतानाय कुलस्य वै॥ २॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती और माद्री के गर्भ से पाण्डु के पाँच महारथी पुत्र उत्पन्न हुए। वे सभी कुरुवंश की परम्परा की रक्षा के लिए देवताओं के अंश से उत्पन्न हुए थे॥ 2॥
 
Pandu had five great warrior sons from the wombs of Kunti and Madri. All of them were born from the parts of the gods to protect the tradition of the Kuru clan.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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