श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 15h
 
 
श्लोक  1.114.15h 
सा चात्मनो मतं सत्यं शशंस परमर्षये।
 
 
अनुवाद
और उसने ऋषि से अपने मन की सारी बातें कह दीं ॥14 1/2॥
 
And he told the sage everything that was in his mind. ॥14 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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