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mahabharat 1.114.13: उसने इसे दो साल तक अपने गर्भ में रखा था, लेकिन जब उसने देखा कि यह इतना कठोर हो गया है, तो उसने इसे फेंक देने का फैसला किया। महर्षि व्यास को जब यह बात पता चली, तो वे बड़ी जल्दी में वहाँ पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 1.114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 114: धृतराष्ट्रके गान्धारीसे एक सौ पुत्र तथा एक कन्याकी तथा सेवा करनेवाली वैश्यजातीय युवतीसे युयुत्सु नामक एक पुत्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.114.13 
द्विवर्षसम्भृता कुक्षौ तामुत्स्रष्टुं प्रचक्रमे।
अथ द्वैपायनो ज्ञात्वा त्वरित: समुपागमत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसने इसे दो साल तक अपने गर्भ में रखा था, लेकिन जब उसने देखा कि यह इतना कठोर हो गया है, तो उसने इसे फेंक देने का फैसला किया। महर्षि व्यास को जब यह बात पता चली, तो वे बड़ी जल्दी में वहाँ पहुँचे।
 
She had carried it in her womb for two years, but when she saw it so hard, she decided to throw it away. Maharishi Vyasa came to know about this and came there in great haste.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)