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mahabharat 1.113.5: वीर पाण्डु के पराक्रम से धृतराष्ट्र ने सौ विशाल अश्वमेध यज्ञ किए और प्रत्येक यज्ञ में एक लाख स्वर्ण मुद्राएँ दक्षिणा दी ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.113: राजा पाण्डुका पत्नियोंसहित वनमें निवास तथा विदुरका विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 113: राजा पाण्डुका पत्नियोंसहित वनमें निवास तथा विदुरका विवाह  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.113.5 
तस्य वीरस्य विक्रान्तै: सहस्रशतदक्षिणै:।
अश्वमेधशतैरीजे धृतराष्ट्रो महामखै:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वीर पाण्डु के पराक्रम से धृतराष्ट्र ने सौ विशाल अश्वमेध यज्ञ किए और प्रत्येक यज्ञ में एक लाख स्वर्ण मुद्राएँ दक्षिणा दी ॥5॥
 
With the bravery of the brave Pandu, Dhritarashtra performed a hundred huge Ashwamedha Yagya and gave dakshina of one lakh gold coins in each yagya. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)