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mahabharat 1.113.3-4: तत्पश्चात् सत्यवती ने भी पाण्डु द्वारा लाये हुए शुभ धन से भीष्म और यशस्विनी कौशल्या को संतुष्ट किया। माता कौशल्या ने उस अतुलनीय एवं तेजस्वी पुरुष पाण्डु का हृदय से उसी प्रकार स्वागत किया, जैसे शची अपने पुत्र जयन्त का स्वागत करती है।   |   mahabharat अध्याय 1.113: राजा पाण्डुका पत्नियोंसहित वनमें निवास तथा विदुरका विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 113: राजा पाण्डुका पत्नियोंसहित वनमें निवास तथा विदुरका विवाह  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.113.3-4 
तत: सत्यवती भीष्मं कौसल्यां च यशस्विनीम्।
शुभै: पाण्डुजितैरर्थैस्तोषयामास भारत॥ ३॥
ननन्द माता कौसल्या तमप्रतिमतेजसम्।
जयन्तमिव पौलोमी परिष्वज्य नरर्षभम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सत्यवती ने भी पाण्डु द्वारा लाये हुए शुभ धन से भीष्म और यशस्विनी कौशल्या को संतुष्ट किया। माता कौशल्या ने उस अतुलनीय एवं तेजस्वी पुरुष पाण्डु का हृदय से उसी प्रकार स्वागत किया, जैसे शची अपने पुत्र जयन्त का स्वागत करती है।
 
India Thereafter, Satyavati also satisfied Bhishma and Yashaswini Kausalya with the auspicious wealth brought by Pandu. Mother Kausalya welcomed the incomparable and brilliant man, Pandu, with her heart in the same way as Sachi greets her son Jayant. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)