श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.112.9 
पूर्वै: प्रवर्तितं किंचित् कुलेऽस्मिन् नृपसत्तमै:।
साधु वा यदि वासाधु तन्नातिक्रान्तुमुत्सहे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
परन्तु इस कुल के पूर्व महान राजाओं ने कुछ शुल्क लगाने का नियम चलाया है। चाहे वह अच्छा हो या बुरा, मैं उसका उल्लंघन नहीं कर सकता॥9॥
 
‘But the earlier great kings of this clan have started a rule of levying some fees. Whether it is good or bad, I cannot violate it.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)