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mahabharat 1.112.44: शत्रुओं के राज्यों का नाश करके अत्यन्त सन्तुष्ट होकर लौटे भीष्म ने अपने पुत्र पाण्डु को हृदय से लगा लिया और हर्ष से रोने लगे ॥44॥   |   mahabharat अध्याय 1.112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.112.44 
प्रमृद्य परराष्ट्राणि कृतार्थं पुनरागतम्।
पुत्रमाश्लिष्य भीष्मस्तु हर्षादश्रूण्यवर्तयत्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं के राज्यों का नाश करके अत्यन्त सन्तुष्ट होकर लौटे भीष्म ने अपने पुत्र पाण्डु को हृदय से लगा लिया और हर्ष से रोने लगे ॥44॥
 
Having returned with great satisfaction after destroying the kingdoms of his enemies, Bhishma embraced his son Pandu and began to cry in joy. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)