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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 40-42
 
 
श्लोक  1.112.40-42 
प्रत्युद्ययुश्च तं प्राप्तं सर्वे भीष्मपुरोगमा:।
ते नदूरमिवाध्वानं गत्वा नागपुरालयात्॥ ४०॥
आवृतं ददृशुर्हृष्टा लोकं बहुविधैर्धनै:।
नानायानसमानीतै रत्नैरुच्चावचैस्तदा॥ ४१॥
हस्त्यश्वरथरत्नैश्च गोभिरुष्ट्रैस्तथाविभि:।
नान्तं ददृशुरासाद्य भीष्मेण सह कौरवा:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जब राजा पाण्डु नगर के निकट आये, तब भीष्म तथा समस्त कौरव उनका स्वागत करने के लिए आगे आये। उन्होंने हर्षपूर्वक देखा कि राजा पाण्डु तथा उनकी टोली बड़े उत्साह के साथ आ रही है। उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो वे हस्तिनापुर से थोड़ी ही दूर गये हों और वहीं से लौट रहे हों। उनके पास नाना प्रकार के वाहन, उत्तम हाथी, घोड़े, रथ, गौ, ऊँट और भेड़ आदि पर लदे हुए नाना प्रकार के धन तथा छोटे-बड़े रत्न थे। जब कौरवों ने भीष्म के साथ वहाँ जाकर देखा, तो वहाँ धन और वैभव का अन्त न था।
 
When King Pandu came near the city, Bhishma and all the Kauravas came forward to receive him. They saw with joy that King Pandu and his group were coming with great enthusiasm. At that time it seemed as if they had gone a short distance from Hastinapur and were returning from there. They had with them various kinds of wealth and small and big gems loaded on various types of vehicles, best elephants, horses, chariots, cows, camels and sheep etc. When the Kauravas went there with Bhishma and saw, there seemed to be no end to the wealth and splendor. 40-42.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)