vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय
»
श्लोक 4
श्लोक
1.112.4
दत्त्वा तस्यासनं शुभ्रं पाद्यमर्घ्यं तथैव च।
मधुपर्कं च मद्रेश: पप्रच्छागमनेऽर्थिताम्॥ ४॥
अनुवाद
वहाँ मद्रराज ने भीष्म को सुन्दर आसन, जल, अर्घ्य और मधु अर्पित करके उनसे उनके आने का प्रयोजन पूछा।
There, after offering him a beautiful seat, water, libation and honey, the Madra king asked Bhishma the purpose of his visit.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×