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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.112.33 
तं कृताञ्जलय: सर्वे प्रणता वसुधाधिपा:।
उपाजग्मुर्धनं गृह्य रत्नानि विविधानि च॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी के सभी राजा हाथ जोड़कर उसके सामने सिर झुकाते थे और विभिन्न प्रकार के रत्न और धन लेकर उसके पास आते थे।
 
All the kings of the earth bowed their heads before him with folded hands and came to him with various kinds of jewels and wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)