श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.112.3 
तमागतमभिश्रुत्य भीष्मं बाह्लीकपुङ्गव:।
प्रत्युद्‍गम्यार्चयित्वा च पुरं प्रावेशयन्नृप:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
बाह्लीकश्रिओमणि के आगमन की खबर सुनकर राजा शल्य भीष्मजी के स्वागत के लिए नगर से बाहर आये और उनका यथोचित स्वागत-सत्कार करके उन्हें राजधानी के अन्दर ले गये।
 
On hearing of the arrival of the Bahlikashriomani King Shalya came out of the city to receive Bhishmaji and after giving him a proper welcome and hospitality took him inside the capital.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)