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mahabharat 1.112.29: नरश्रेष्ठ जनमेजय! इस प्रकार पाण्डु ने काशी, सुहाग और पुण्ड्र देशों को जीतकर अपने बाहुबल और पराक्रम से कुरुकुल की कीर्ति का विस्तार करना आरम्भ किया॥29॥   |   mahabharat अध्याय 1.112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 112: माद्रीके साथ पाण्डुका विवाह तथा राजा पाण्डुकी दिग्विजय  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.112.29 
तथा काशिषु सुह्मेषु पुण्ड्रेषु च नरर्षभ।
स्वबाहुबलवीर्येण कुरूणामकरोद् यश:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ जनमेजय! इस प्रकार पाण्डु ने काशी, सुहाग और पुण्ड्र देशों को जीतकर अपने बाहुबल और पराक्रम से कुरुकुल की कीर्ति का विस्तार करना आरम्भ किया॥29॥
 
Narashreshtha Janamejaya! In this way, Pandu conquered the countries of Kashi, Suham and Pundra and started expanding the fame of Kurukula with his muscle power and bravery. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)