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mahabharat 1.111.10: अनंत सौभाग्य से संपन्न कुरुनन्दन पाण्डु, कुन्तिभोज और कुमारी कुनती के साथ मिलकर शची सहित इन्द्र के समान शोभायमान हो गए ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.111: कुन्तीद्वारा स्वयंवरमें पाण्डुका वरण और उनके साथ विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 111: कुन्तीद्वारा स्वयंवरमें पाण्डुका वरण और उनके साथ विवाह  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.111.10 
स तया कुन्तिभोजस्य दुहित्रा कुरुनन्दन:।
युयुजेऽमितसौभाग्य: पौलोम्या मघवानिव॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अनंत सौभाग्य से संपन्न कुरुनन्दन पाण्डु, कुन्तिभोज और कुमारी कुनती के साथ मिलकर शची सहित इन्द्र के समान शोभायमान हो गए ॥10॥
 
Kurunandan Pandu, blessed with infinite good fortune, united with Kuntibhoja and Kumari Kunti and became beautiful like Indra along with Sachi. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)