श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक d14h
 
 
श्लोक  1.110.d14h 
कर्ण उवाच
इच्छामि भगवद्दत्तां शक्तिं शत्रुनिबर्हणीम्।)
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा- हे प्रभु! मुझे आपका दिया हुआ वह अमोघ भाला चाहिए, जो शत्रुओं का नाश कर देगा।
 
Karna said- O Lord! I want that infallible spear given by you, which will destroy the enemies.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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