श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.110.6 
तस्यै स प्रददौ मन्त्रमापद्धर्मान्ववेक्षया।
अभिचाराभिसंयुक्तमब्रवीच्चैव तां मुनि:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भविष्य में आने वाले संकट का विचार करके दुर्वासा ने पृथा को धर्म की रक्षा के लिए एक वशीकरण मन्त्र दिया और उसके प्रयोग की विधि भी बताई। तत्पश्चात् ॥6� ...
 
Thinking about the future danger that might befall Pritha, Durvasa gave him a Vashikaran Mantra to protect his Dharma and also told him the method of using it. After that the sage said to him -॥ 6॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas