श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.110.27 
तमिन्द्रो ब्राह्मणो भूत्वा भिक्षार्थी समुपागमत्।
कुण्डले प्रार्थयामास कवचं च महाद्युति:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् एक दिन महान् तेजस्वी देवराज इन्द्र ब्राह्मण का वेश धारण करके कर्ण के पास भिक्षा मांगने आए और उससे कवच तथा कुण्डल माँगे॥27॥
 
After that, one day the great and brilliant Devraj Indra disguised himself as a Brahmin and came to Karna for alms and asked him for armor and earrings. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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