श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 110: कुन्तीको दुर्वासासे मन्त्रकी प्राप्ति, सूर्यदेवका आवाहन तथा उनके संयोगसे कर्णका जन्म एवं कर्णके द्वारा इन्द्रको कवच और कुण्डलोंका दान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.110.24 
नामधेयं च चक्राते तस्य बालस्य तावुभौ।
वसुना सह जातोऽयं वसुषेणो भवत्विति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
दम्पति ने बालक का नाम इस प्रकार रखा - वह वसु (कवच, कुण्डल आदि धन) लेकर उत्पन्न हुआ है, अतः उसे वसुषेण नाम से जाना जाना चाहिए।
 
The couple named the child thus: He was born with Vasu (wealth like armour, earrings etc.), so he should be known as Vasusena. 24.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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