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श्लोक 1.110.2  |
पितृष्वस्रीयाय स तामनपत्याय भारत।
अग्रॺमग्रे प्रतिज्ञाय स्वस्यापत्यं स सत्यवाक्॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| भरत! सत्यवादी शूरसेन ने अपने चचेरे भाई कुन्तीभोज से, जो निःसंतान थे, पहले ही प्रतिज्ञा कर ली थी कि मैं अपनी प्रथम संतान उन्हीं को दान करूँगा॥ 2॥ |
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| Bharata! The truthful Shurasena had already made a vow to his cousin brother Kunti Bhoja who was childless, that he would gift his first child to him.॥ 2॥ |
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