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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 107: माण्डव्यका धर्मराजको शाप देना
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श्लोक 17
श्लोक
1.107.17
आ चतुर्दशकाद् वर्षान्न भविष्यति पातकम्।
परत: कुर्वतामेवं दोष एव भविष्यति॥ १७॥
अनुवाद
चौदह वर्ष की आयु तक कोई पाप नहीं करेगा, केवल उससे अधिक आयु में पाप करने वाले ही दोषी ठहरेंगे ॥17॥
No one will commit any sin till the age of fourteen. Only those who commit sins above that age will be blamed. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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