Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.106.15-16: वह प्राण धारण करके ऋषियों को स्मरण मात्र से अपने पास बुलाने लगा। फाँसी के फंदे पर तप करने वाले उस महात्मा से प्रभावित होकर समस्त तपस्वी ऋषिगण अत्यन्त व्याकुल हो गए। वे रात्रि में पक्षियों का रूप धारण करके वहाँ उड़ते हुए आए और अपनी-अपनी शक्ति के अनुसार अपना रूप प्रकट करके उस महाब्राह्मण ऋषि माण्डव्य से पूछने लगे॥15-16॥   |   mahabharat अध्याय 1.106: महर्षि माण्डव्यका शूलीपर चढ़ाया जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 106: महर्षि माण्डव्यका शूलीपर चढ़ाया जाना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  1.106.15-16 
धारयामास च प्राणानृषींश्च समुपानयत् ।
शूलाग्रे तप्यमानेन तपस्तेन महात्मना॥ १५॥
संतापं परमं जग्मुर्मुनयस्तपसान्विता:।
ते रात्रौ शकुना भूत्वा संनिपत्य तु भारत।
दर्शयन्तो यथाशक्ति तमपृच्छन् द्विजोत्तमम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वह प्राण धारण करके ऋषियों को स्मरण मात्र से अपने पास बुलाने लगा। फाँसी के फंदे पर तप करने वाले उस महात्मा से प्रभावित होकर समस्त तपस्वी ऋषिगण अत्यन्त व्याकुल हो गए। वे रात्रि में पक्षियों का रूप धारण करके वहाँ उड़ते हुए आए और अपनी-अपनी शक्ति के अनुसार अपना रूप प्रकट करके उस महाब्राह्मण ऋषि माण्डव्य से पूछने लगे॥15-16॥
 
He held on to his life and began to call the sages to him by merely remembering him. Impressed by that great soul who was performing penance on the tip of a gallows, all the ascetic sages became very distressed. They came flying there in the night taking the form of birds and started asking that great Brahmin sage Mandavya, revealing their form according to their powers.॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)