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श्लोक 1.103.26  |
श्रुत्वा तं प्रतिपद्यस्व प्राज्ञै: सह पुरोहितै:।
आपद्धर्मार्थकुशलैर्लोकतन्त्रमवेक्ष्य च॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| आपत्काल के धर्म का निर्णय करने में निपुण विद्वान् पुरोहितों की बात सुनकर तथा प्रजातंत्र को देखकर ही निर्णय करें॥ 26॥ |
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| Take a decision after listening to the learned priests who are proficient in deciding the dharma of an emergency and also after looking at the democracy.॥ 26॥ |
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इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि भीष्मसत्यवतीसंवादे त्र्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १०३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें भीष्म-सत्यवती-संवादविषयक एक सौ तीनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०३॥
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