श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.103.15 
परित्यजेयं त्रैलोक्यं राज्यं देवेषु वा पुन:।
यद् वाप्यधिकमेताभ्यां न तु सत्यं कथंचन॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मैं तीनों लोकों का राज्य, देवताओं का राज्य अथवा इनसे भी अधिक महत्त्वपूर्ण वस्तु त्याग सकता हूँ, परन्तु सत्य को किसी भी प्रकार त्याग नहीं सकता॥15॥
 
'I can give up the kingdom of the three worlds, the kingdom of the gods, or even something more important than these, but I cannot give up the Truth in any way.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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