श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.103.11 
राज्ये चैवाभिषिच्यस्व भारताननुशाधि च।
दारांश्च कुरु धर्मेण मा निमज्जी: पितामहान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘राजसिंहासन पर अभिषिक्त होकर भारत की प्रजा का पालन करो। धर्मानुसार विवाह करो; अपने पूर्वजों को नरक में मत जाने दो।’॥11॥
 
‘Anoint yourself on the throne and take care of the Indian subjects. Marry according to the Dharma; do not let your ancestors fall into hell.’॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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