भीष्मस्तदा स्वयं कन्या वरयामास ता: प्रभु:।
उवाच च महीपालान् राजञ्जलदनि:स्वन:॥ ११॥
रथमारोप्य ता: कन्या भीष्म: प्रहरतां वर:।
आहूय दानं कन्यानां गुणवद्भॺ: स्मृतं बुध:॥ १२॥
अलंकृत्य यथाशक्ति प्रदाय च धनान्यपि।
प्रयच्छन्त्यपरे कन्या मिथुनेन गवामपि॥ १३॥
अनुवाद
राजन! वह बड़ा पराक्रमी था और उस समय उसने स्वयं ही सब कन्याओं का चयन किया था। इतना ही नहीं, आक्रमणकारियों में श्रेष्ठ वीर भीष्म ने उन कन्याओं को उठाकर अपने रथ पर बिठा लिया और मेघों के समान गम्भीर वाणी में समस्त राजाओं को ललकारते हुए कहा, 'विद्वानों ने कहा है कि यह (ब्रह्म विवाह) उत्तम है कि कन्या को अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्राभूषणों से सुसज्जित करो, किसी गुणवान वर को बुलाकर उसे कुछ धन दो और फिर कन्या का विवाह कर दो। कुछ लोग विवाह में गाय-बैल का जोड़ा देते हैं (यह आर्ष विवाह है)।'
King! He was very powerful and at that time he himself chose all the girls. Not only this, the brave Bhishma, the best among the attackers, picked up those girls and put them on his chariot and challenged all the kings in a voice as deep as the clouds and said, 'The learned have said that it is best (Brahma marriage) to decorate the girl with clothes and ornaments as per your capability and invite a virtuous groom and give him some money and then give away the girl in marriage. Some people give away a pair of cows and bulls in marriage (this is Aarsha marriage).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥