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श्लोक 1.101.d1-1  |
वैशम्पायन उवाच
(चेदिराजसुतां ज्ञात्वा दाशराजेन वर्धिताम्।
विवाहं कारयामास शास्त्रदृष्टेन कर्मणा॥ )
ततो विवाहे निर्वृत्ते स राजा शान्तनुर्नृप:।
तां कन्यां रूपसम्पन्नां स्वगृहे संन्यवेशयत्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायन कहते हैं - यह जानकर कि सत्यवती चेदिराज वासुकि की पुत्री है और निषादराज ने उसका पालन-पोषण किया है, राजा शान्तनु ने शास्त्र विधिपूर्वक उससे विवाह किया। विवाह सम्पन्न होने के बाद राजा शान्तनु ने उस सुन्दर कन्या को अपने महल में रख लिया॥1॥ |
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| Vaishampayana says - Knowing that Satyavati is the daughter of Chediraj Vasuki and that she was brought up by Nishadraj, King Shantanu married her according to the scriptures. After the marriage was completed, King Shantanu kept that beautiful girl in his palace.॥1॥ |
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