श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 101: सत्यवतीके गर्भसे चित्रांगद और विचित्रवीर्यकी उत्पत्ति, शान्तनु और चित्रांगदका निधन तथा विचित्रवीर्यका राज्याभिषेक  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.101.3 
अथापरं महेष्वासं सत्यवत्यां सुतं प्रभु:।
विचित्रवीर्यं राजानं जनयामास वीर्यवान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद महाबली एवं पराक्रमी राजा शान्तनु ने दूसरे पुत्र को जन्म दिया, जो महान धनुर्धर राजा विचित्रवीर्य थे ॥3॥
 
After this, the mighty and powerful King Shantanu gave birth to a second son, the great archer King Vichitravirya. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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