Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.100.d6: भीष्म बोले, "सारथी! तुम मेरे पिता के मित्र हो, क्योंकि तुम ही उनका रथ हांकते हो। क्या तुम जानते हो कि महाराज किस स्त्री पर मोहित हैं? यदि मैं पूछूं तो मैं तुम्हारी बात मानूंगा, विपरीत नहीं करूंगा।" | mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
त्वं सारथे पितुर्मह्यं सखासि रथयुग् यत:।
अपि जानासि यदि वै कस्यां भावो नृपस्य तु॥
यथा वक्ष्यसि मे पृष्ट: करिष्ये न तदन्यथा।
अनुवाद
भीष्म बोले, "सारथी! तुम मेरे पिता के मित्र हो, क्योंकि तुम ही उनका रथ हांकते हो। क्या तुम जानते हो कि महाराज किस स्त्री पर मोहित हैं? यदि मैं पूछूं तो मैं तुम्हारी बात मानूंगा, विपरीत नहीं करूंगा।"
Bhishma said, "Charioteer! You are my father's friend because you are the one who drives his chariot. Do you know which woman Maharaja is in love with? If I ask, I will do as you say and will not do the opposite."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥