Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.100.95: हे राजाओं! मैंने अपना राज्य तो त्याग दिया है; अब मैं अपनी सन्तानों के लिए भी दृढ़ निश्चय कर रहा हूँ॥ 95॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  1.100.95 
राज्यं तावत् पूर्वमेव मया त्यक्तं नराधिपा:।
अपत्यहेतोरपि च करिष्येऽद्य विनिश्चयम्॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
हे राजाओं! मैंने अपना राज्य तो त्याग दिया है; अब मैं अपनी सन्तानों के लिए भी दृढ़ निश्चय कर रहा हूँ॥ 95॥
 
O kings! I have already given up my kingdom; now I am making a firm resolve for my children as well.॥ 95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)