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mahabharat 1.100.87: 'देखो, तुम जो चाहो या कहो, मैं वही करूँगा। इस सत्यवती के गर्भ से जो पुत्र उत्पन्न होगा, वही हमारा राजा होगा।'॥87॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  1.100.87 
एवमेतत् करिष्यामि यथा त्वमनुभाषसे।
योऽस्यां जनिष्यते पुत्र: स नो राजा भविष्यति॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
'देखो, तुम जो चाहो या कहो, मैं वही करूँगा। इस सत्यवती के गर्भ से जो पुत्र उत्पन्न होगा, वही हमारा राजा होगा।'॥87॥
 
'Look, whatever you want or say, I will do that. The son born from this Satyavati's womb will become our king.'॥ 87॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)