Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.100.8: हे जनमेजय! जब सब राजाओं ने शान्तनु को अपना स्वामी और रक्षक बना लिया, तब किसी को भी कोई शोक, भय या मानसिक वेदना नहीं रही। सब लोग सुखपूर्वक सोने और जागने लगे॥8॥ | mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वीतशोकभयाबाधा: सुखस्वप्ननिबोधना:।
पतिं भारत गोप्तारं समपद्यन्त भूमिपा:॥ ८॥
अनुवाद
हे जनमेजय! जब सब राजाओं ने शान्तनु को अपना स्वामी और रक्षक बना लिया, तब किसी को भी कोई शोक, भय या मानसिक वेदना नहीं रही। सब लोग सुखपूर्वक सोने और जागने लगे॥8॥
O Janamejaya! When all the kings made Shantanu their lord and protector, then no one had any grief, fear or mental anguish. Everyone started sleeping and waking up comfortably. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥