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mahabharat 1.100.79: यह कन्या एक आर्य पुरुष की संतान है, जो गुणों में आपके समान है और जिसके वीर्य से यह सुन्दर सत्यवती उत्पन्न हुई है॥ 79॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.100.79 
अपत्यं चैतदार्यस्य यो युष्माकं समो गुणै:।
यस्य शुक्रात् सत्यवती सम्भूता वरवर्णिनी॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
यह कन्या एक आर्य पुरुष की संतान है, जो गुणों में आपके समान है और जिसके वीर्य से यह सुन्दर सत्यवती उत्पन्न हुई है॥ 79॥
 
This girl is the child of an Aryan man, who is equal to you in qualities and from whose semen this beautiful Satyavati was born.॥ 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)