Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.100.77: हे भरतर्षभ! हे राजा शान्तनु के पुत्र, आप ही सबकी रक्षा करने के लिए पर्याप्त हैं। आप शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ माने जाते हैं; फिर भी मैं अपनी बात आपके समक्ष रखता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  1.100.77 
त्वमेव नाथ: पर्याप्त: शान्तनोर्भरतर्षभ।
पुत्र: शस्त्रभृतां श्रेष्ठ: किं तु वक्ष्यामि ते वच:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतर्षभ! हे राजा शान्तनु के पुत्र, आप ही सबकी रक्षा करने के लिए पर्याप्त हैं। आप शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ माने जाते हैं; फिर भी मैं अपनी बात आपके समक्ष रखता हूँ।
 
O Bharataarshabha! You alone, son of King Shantanu, are sufficient to protect everyone. You are considered the best amongst those who wield weapons; but still I will put my point before you. 77.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)